May 2020
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बहुत लंबे समय से, मैं चिड़ियाघर की सैर करना चाहता था। आखिरकार पिछले हफ्ते रविवार को, मेरे माता-पिता ने दिल्ली के चिड़ियाघर में जाने की योजना बनाई। मैं बेहद खुश था। हम लोग चिड़ियाघर के ठीक खुलने के समय पर वहाँ पहुँच गए। मेरे पिता ने हम सभी के लिए टिकट खरीदे और फिर हम मुख्य द्वार से चिड़ियाघर में दाखिल हुए।

वहाँ पर सभी जानवरों और पक्षियों के लिए उनके अनुकूल स्थान और बड़े पिंजरे थे जिनमें वह आसानी से रह सके। हमने वहाँ हिरण, बन्दर, लंगूर, लोमड़ी, बारहसिंगा, काला हिरन, जेब्रा और जिराफ देखें, उनमें से कुछ जानवर कुछ खाने की उम्मीद में हमारे तरफ आ गए थे। हमने वहाँ दो गैंडों को बाड़े के अंदर मैदान में घूमते देखा।

हमने चिड़ियाघर में आगे चलकर शेर, तेंदुआ, बाघ, चीता और काला भालू जैसे जंगली जानवर देखें। हमने एक अलग पिंजरे में एक सफेद बाघ भी देखा। इनके पिंजरे इन जानवरों को जंगल की तरह प्राकृतिक स्थान देने के लिए काफी बड़े बनाये गए थे।

हमने तालाब में काले हंस देखे। एक अलग तालाब में, मगरमच्छ तैर रहे थे। पास में सांप और अजगर के बाड़े थे। फिर हमने नीले-पीले तोते देखे जिनमें ज्यादातर के शीर्ष भाग नीले और निचले भाग पीले रंग के थे। हमने पानी में दरियाई घोड़े को देखा, जिसकी पीठ पर बैठा एक कौवा आनंदित हो रहा था। वहाँ पर सबसे ज्यादा भीड़ तो मोर और हाथियों ने आकर्षित की हुई थी।

उन सभी जानवरों को वास्तविक रूप से देखना मेरे लिए एक अद्भुत अनुभव था। अगली बार में अपने मित्रों और सहपाठियो के साथ चिड़ियाघर जाना पसंद करुँगा क्योंकि जो ज्ञान, मनोरंजन और एक अविस्मरणीय अनुभव मुझे प्राप्त हुआ उसे वो सब भी प्राप्त कर सकें।

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भारत में बहुत सारी आकर्षक प्राचीन इमारतें हैं जो हमें हमारा इतिहास बतलाती हैं और हमें विस्मित भी करती हैं। यह हमारे इतिहास को जानने के लिए हमारी रुचि को बढ़ावा देती है। ऐतिहासिक स्थानों पर यात्रा करने से छात्र अपनी कक्षा की शिक्षा को वास्तविक दुनिया से जोड़कर देख पाते हैं और यह बोरियत को भी मिटाता है। मुझे ऐतिहासिक इमारतों को करीब से जानने का बहुत शौक है इसलिए मैंने अपने मित्रों के साथ ताजमहल घूमने की योजना बनाई।

हम चार दोस्तों ने पिछले हफ्ते अपनी कार से आगरा जाने का निश्चय किया। हमने दिल्ली से आगरा पहुँचने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे का मार्ग निश्चित किया। रास्ते में एक भोजनालय में हमनें नाश्ता किया और लगभग 11 बजे हम आगरा शहर में प्रवेश कर गए। हमने अपनी कार पूर्वी गेट पार्किंग में लगा दी और स्मारक के प्रवेश द्वार तक पहुँचने के लिए बैटरी से चलने वाला ऑटो-रिक्शा लिया। ताजमहल के प्रवेश द्वार पर, हमने टिकट खरीदे और सुरक्षा जांच से गुजर कर भीतर प्रवेश किया।

भीतर प्रवेश करने पर हमें दो बड़े लॉन दिखे, जिनके मध्य में, मुख्य मकबरे तक पहुँचने के लिए रास्ता था। और इस रास्ते के साथ में लगे फव्वारे इसकी शोभा बड़ा रहे थे। हमने देखा कि ताज एक उठे हुए मंच पर खड़ा है। इसके चारों कोनों पर चार बुलंद मीनारें हैं। यह एक हाथी दांत जैसे सफेद संगमरमर का मकबरा है जो कि भारतीय शहर आगरा में यमुना नदी के दक्षिण तट पर स्थित है। इसे मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी प्यारी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था।

यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में से एक है और विश्व के सात अजूबों में से एक है। यह चांदनी रात में बहुत खूबसूरत लगता है इसलिए यादों को उल्लेखनीय और चिरस्थायी बनाने के लिए लोग पूर्णिमा की रात में ताजमहल को घूमना करना पसंद करते हैं। ताजमहल जैसी सबसे खूबसूरत इमारत को देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग यहाँ आते हैं।

काफी देर तक अंदर रहने के बाद हमने वहाँ से जाने का फैसला किया। ताजमहल की यात्रा पूरी तरह से मजेदार और शैक्षिक थी। दुनिया में ऐसी बहुत सारी खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतें हैं जिन्हें मैंने नहीं देखा है। लेकिन यदि मेरा दोबारा आगरा आना हुआ तो मैं इसे फिर से देखना चाहूँगा।

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EnglishHindi
Actorअभिनेता
Actressअभिनेत्री
Animatorव्यंग्य-चित्रकार, एनिमेटर
Anthropologistमानवविज्ञानी
Archaeologistपुरातत्त्ववेत्ता
Architectवास्तुकार
Astronautअंतरिक्ष यात्री
Astronomerखगोलविद
Authorलेखक
Bakerबेकर, नानबाई
Bankerबैंकर
Bartenderबारमैन
Biochemistजीव रसायनज्ञानी
Biologistजीवविज्ञानी
Botanistवनस्पति-विज्ञानिक
Carpenterबढ़ई
Cartoonistकार्टूनिस्ट, व्यंगचित्रकार
Chemistरसायनज्ञ
Choreographerकोरियोग्राफर, नृत्य-रचनाकार
Comedianहास्य अभिनेता
Chefबावर्ची
Cookरसोइया
Dancerनर्तक, नर्तकी
Dentistदंत चिकित्सक
Doctorचिकित्सक
Ecologistपरिस्थितिविज्ञानशास्री
Economistअर्थशास्त्री
Electricianबिजली मिस्त्री
Engineerइंजीनियर, अभियान्ता
Farmerकिसान
Fashion designerफैशन डिजाइनर
Film directorफिल्म निर्देशक
Film producerचलचित्र निर्माता
Filmmakerफ़िल्म निर्माता
Geologistभूविज्ञानी
Hair stylistबालों की स्टाइल बनाने वाला
Historianइतिहासकार
Illusionistजादूगर
Interior designerआंतरिक साजसज्जा विशेषज्ञ
Inventorआविष्कारक
Jewellery designerआभूषण डिजाइनर
Journalistपत्रकार
Lawyerवकील
Lyricistगीतकार
Magicianजादूगर
Makeup artistमेकअप कलाकार
Mathematicianगणितज्ञ
Mechanicमैकेनिक
Microbiologistसूक्ष्मजीव विज्ञानी
Neuroscientistन्यूरोसाइंटिस्ट
News anchorन्यूज ऐंकर
Painterचित्रकार
Photographerफोटोग्राफर
Pilotपायलट
Poetकवि
Police Officerपुलिस अधिकारी
Postmanडाकिया
Potterकुम्हार
Psychologistमनोविज्ञानी
Scientistवैज्ञानिक
Sculptorमूर्तिकार
Secretaryसेक्रेटरी
Singerगायक, गायिका
Tattoo artistगोदना कलाकार
Teacherअध्यापक,अध्यापिका, शिक्षक, शिक्षिका
Watchmenचौकीदार
Writerलेखक
Zoologistजीव विज्ञानी
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परमाणु संयंत्र यूरेनियम परमाणुओं को विभाजित करके गर्मी के रूप में ऊर्जा का उत्पादन करते हैं। जिसे आगे टरबाइन जनरेटर की मदद से बिजली उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है। नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन से उत्पन्न ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा है क्योंकि यह वायुमंडल में कार्बन, सल्फर, नाइट्रोजन या अन्य ग्रीनहाउस गैसों जैसी प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन नहीं करती है। परमाणु ऊर्जा द्वारा विभिन्न उद्देश्य पूरे होते हैं। कृषि उत्पादन से लेकर बिजली पैदा करने तक, कैंसर के इलाज से लेकर प्रदूषण को नियंत्रित करने तक, परमाणु ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए परमाणु ऊर्जा बहुत उपयोगी है। बाँझ कीट तकनीक, पर्यावरण के अनुकूललित एक कीट नियंत्रण विधि है जिसका उपयोग करके कीटों की आबादी को नियंत्रित किया जाता है। यह विधि फल मक्खियों और कैटरपिलर को नियंत्रित करती है। फल कीट, मुख्य रूप से फल और सब्जियों को नुकसान पहुंचाते हैं और कैटरपिलर कीट खाद्य फसलों, जंगलों, पौधों, फलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह तकनीक, कृषि खाद्य में वृद्धि के आशाजनक परिणाम दिखाती है। और इसके अलावा, खाद्य विकिरण प्रौद्योगिकी का उपयोग भोजन के संरक्षण के लिए किया जाता है।

परमाणु ऊर्जा संयंत्र बिजली का उत्पादन करते हैं जिससे हमारे घरों, स्कूलों, अस्पतालों, संग्रहालयों, भवनों को प्रकाशित करने के लिए बिजली मिलती है। बिजली हमारे लिए कई मायनों में चमत्कार करती है क्योंकि हमारी दैनिक गतिविधियाँ जैसे कार्यालय में काम करने से लेकर घर में खाना बनाने तक बिजली पर निर्भर करती है।

परमाणु चिकित्सा विकिरण का उपयोग थायरॉयड, हड्डियों, हृदय, यकृत जैसे मानव अंगों के कामकाज की पहचान करने के लिए होता है जिससे उनका इलाज करने में मदद मिलती है। रेडियोथेरेपी का उपयोग कैंसर के उपचार में सहायक है, जिसमें विकिरण का उपयोग विशेष रूप से लक्षित कोशिकाओं को नष्ट करने या कमजोर करने के लिए किया जाता है। रेडियो आइसोटोप का उपयोग चिकित्सा उपकरणों को कीटाणुरहित करने के लिए किया जाता है।

सतह और भूमिगत जल संसाधनों का पता करके पानी की समस्याओं को हल करने के लिए आइसोटोप जल विज्ञान तकनीक, रेडियोधर्मी आइसोटोपिक तकनीक का उपयोग करती है। परमाणु तकनीकें वायुमंडल से प्रदूषकों का पता लगाने और उनका विश्लेषण करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परमाणु ऊर्जा बाहरी अंतरिक्ष अभियानों में ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

मेरी राय में, परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है जो ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में सहायक है। लेकिन हथियारों और सैन्य उद्देश्यों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना अत्यन्त खतरनाक हो सकता है। भविष्य में, यह कोयला और तेल जैसे मौजूदा ऊर्जा-उत्पादक संसाधनों का स्थान ले सकती है। लेकिन हम परमाणु ऊर्जा संयंत्रों द्वारा घातक रेडियोधर्मी उत्सर्जन को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं इन संयंत्रों को इस शक्ति को सम्भालने के लिए सबसे मजबूत बुनियादी ढांचे और सावधान पर्यवेक्षण की आवश्यकता होती है।

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हम सब सदियों से युद्ध लड़ रहे हैं और इस क्षेत्र में अपना ज्ञान बढ़ाने में भी कामयाब रहे हैं। हमने अपने हथियारों को पत्थर से परमाणु बम तक उन्नत किया है। अब हमारे हथियारों में देवताओं वाली शक्ति है। यह शक्ति इतनी विशाल है कि यह हमेशा युद्धों के रूप में दुनिया में विनाश का कारण बनती है। आजकल देश अपनी जीडीपी का सबसे बड़ा प्रतिशत अपनी सेना पर खर्च करते हैं। यद्यपि, इस धन का उपयोग समाज के कल्याण और देश के विकास के लिए किया जा सकता है।

पुराने समय में, युद्ध केवल उन लोगों की मृत्यु का कारण बनता है जो युद्धस्थल में लड़ रहे होते थे। लेकिन आधुनिक युद्ध नागरिकों के जीवन को भी नष्ट कर देते हैं। युद्धों के दौरान स्कूल, कॉलेज, कारखाने, मॉल, सिनेमा घर और कोई भी अन्य सार्वजनिक स्थान बन्द रहते हैं। नागरिक गोलीबारी से मारे जाते हैं। तोपखाने द्वारा हमले और विमान से गिराए जाने वाले बम, गांवों, कस्बों, सार्वजनिक भवनों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, संग्रहालयों, मिलों आदि को नष्ट कर देते है।

युद्धों के दौरान, देशों की अर्थव्यवस्था नीचे गिर जाती है। आर्थिक नुकसान से उबरने में बहुत अधिक समय लगता है। कमोडिटी की कीमतों के बढ़ने से गरीब लोगों का जीवन मुश्किल हो जाता है। भूख के कारण लोग प्यार और सहानुभूति भूल जाते है और वे किसी भी कीमत पर जीवित रहने के लिए एक-दूसरे को मारते हैं।

विज्ञान की मदद से, हमने परमाणु हथियार, परमाणु बम, हाइड्रोजन बम, मिसाइल, पनडुब्बी, टैंक, जहरीली गैसें, रासायनिक हथियार, बमवर्षक विमान, रॉकेट, युद्धपोत, आदि जैसे भयानक हथियारों का आविष्कार किया है, क्योंकि इन हथियारों के कारण विश्व युद्धों, हिरोशिमा और नागासाकी, सीरियाई गृहयुद्ध, डारफुर युद्ध, इराक युद्ध, अफगानिस्तान युद्ध, बोको हराम के खिलाफ युद्ध, यमनी गृह युद्ध, डोनबास में युद्ध, आदि में कई लोगों ने अपनी जान गवाई हैं। कई देशों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, भारत, फ्रांस, इजरायल, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया के पास परमाणु बम हैं जो मिनटों के भीतर मानव जाति को समाप्त कर सकते हैं।

सत्ता के लालच का कोई अंत नहीं है, सब कुछ पा लेने के बाद भी यह समाप्त नहीं होगा। कुछ राजनेता, कुछ देश और आतंकवादी समूह आतंक का एक हथियार के रूप में उपयोग कर दूसरों पर हावी होने का प्रयास करते हैं। इसके कारण कई निर्दोष लोगों को, या तो मौत या फिर दुखों का सामना करना पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र संघ को 1945 में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से स्थापित किया था। हर साल, संयुक्त राष्ट्र की महासभा, विकास, शांति और सुरक्षा के अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा भी करती है।

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बिजली आधुनिक युग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज हमारा अधिकांश जीवन बिजली से चलने वाली चीजों पर निर्भर है। लोग प्रकाश, फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, सिनेमा, हीटिंग, शीतलन, परिवहन, घरेलू उपकरणों, उद्योगों में मशीनरी और कई अन्य स्थानों के लिए बिजली का उपयोग करते हैं। बिजली ने इंसानों के लिए बहुत खुशी और समृद्धि ला दी है। यह वास्तव में मानवता के लिए वरदान है।

स्मार्टफोन, लैपटॉप को चार्ज करने के लिए बिजली का उपयोग किया जाता है। यह हमें कुछ ही समय में पूरी दुनिया में मैसेज भेजने और प्राप्त करने, वॉइस और वीडियो कॉलिंग करने में मदद करता है। आज बिजली का इस्तेमाल गाड़ियों, मेट्रो, बसों, कारों और अन्य सभी प्रकार के वाहनों को चलाने के लिए किया जाता है।

घरेलू जीवन में, बिजली एक वरदान है। इसका उपयोग हमारे घरों को प्रकाशित करने के लिए किया जाता है, हम माइक्रोवेव और ओवन में भोजन को बनाते और पकाते हैं, हम इलेक्ट्रिक इंडक्शन और केतली में 
दूध और पानी को उबालते हैं, वाशिंग मशीन हमारे कपड़े धोती है, डिशवॉशर हमारे बर्तनों को धोती है, एयर कंडीशनर हमारे कमरे और दुकानों को ठंडा करता है, विद्युत ऊष्मा यन्त्र सर्द ऋतु में हमें गर्मी प्रदान करता है, इस प्रकार बिजली इस तरह के कई अंतहीन कामों में उपयोगी हैं।

बिजली मनोरंजन के महान स्रोत प्रदान करती है। यह हमें रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा और मनोरंजन पार्क के माध्यम से मनोरंजन प्रदान करती है। रेडियो के माध्यम से हम गीत, कहानी, संवाद, भाषण और समाचार सुन सकते हैं। टेलीविजन हमें न केवल सुनने के लिए बल्कि गायक या वक्ता का चेहरा देखने के लिए भी सक्षम बनाता है। सिनेमा मनोरंजन का सबसे सस्ता साधन बन गया है। हम मनोरंजन पार्कों में विद्युत ऊर्जा से चलने वाली सवारी और खेलों का आनंद लेते हैं। डिज़नीलैंड और यूनिवर्सल स्टूडियो प्रसिद्ध मनोरंजन पार्क हैं, जिन्हें दुनिया भर में जाना जाता है।

चिकित्सा क्षेत्र में, बिजली एक क्रांतिकारी भूमिका निभाती है। यह बिजली के कारण है कि इस क्षेत्र में नई खोज और आविष्कार किए गए हैं। यह कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। यह कैंसर के उपचार में बहुत उपयोगी है। एक्स-रे और ईसीजी बिजली के वरदान हैं। एक्स-रे आंतरिक रोगों और हड्डियों के फ्रैक्चर का पता लगाने में मदद करता है। ईसीजी का उपयोग दिल से संबंधित बीमारियों का पता लगाने के लिए किया जाता है।

बिजली ने अपने आप को औद्योगिक विकास में बहुत काम का साबित किया है। इसकी मदद से मिलों और कारखानों में विशाल और भारी मशीनें चलती है। बिजली की मदद से बड़ी नहरों और कुओं को खोदा जा सकता है। हम सूखी और बंजर भूमि की सिंचाई के लिए इसका उपयोग करते हैं। बिजली के उपकरण पुल और बांध बना सकते हैं और नदियों के प्रवाह को बदल सकते हैं।

विद्युत ऊर्जा ने ज्ञान को फैलाने में बहुत मदद की है। प्रिंटिंग मशीनें इलेक्ट्रिक पावर पर चलती हैं जो समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और पुस्तकों को प्रिंट करने में मदद करती हैं। कंप्यूटर की मदद से, अब कोई भी व्यक्ति घर पर रहकर ऑनलाइन अध्ययन और काम कर सकता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि हम अपनी अधिकांश दैनिक गतिविधियों के लिए बिजली पर निर्भर हैं। जीवन का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिसमें बिजली की मुहर न लगी हो। यह वास्तव में, विज्ञान के मुकुट में सबसे अनमोल रत्न है। इसलिए हमें बिजली बर्बाद नहीं करनी चाहिए। यह ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्रोत है जो हमें नुकसान भी पहुंचा सकता है इसलिए हमें इसका उपयोग करने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए।

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लक्ष्य के बिना किसी भी मनुष्य का जीवन उसी प्रकार है जिस प्रकार बिना पतवार वाली नौका या बिना पायलट वाले हवाई जहाज का है। इसलिए हमारे जीवन में लक्ष्य का होना अति आवश्यक है। हमें एक उचित पेशा चुनकर जीवन में एक निश्चित उद्देश्य चुनना चाहिए। यदि हम एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं तो हमें एक लक्ष्य अवश्य ही निर्धारित करना चाहिए।

आज हमारे पास काम करने के लिए बहुत सारे क्षेत्र हैं। इसलिए सही पेशा चुनना बहुत मुश्किल है। सही पेशा जीवन में सफलता की कुंजी है। पेशे को चुनने का सवाल अतीत में बहुत गंभीर नहीं था। बेटा आमतौर पर अपने पिता के पेशे का अनुसरण करता था। लेकिन अब समय बदल गया है। लोगों में प्रतिभा और पसन्द अलग हैं। हर पेशा हर किसी के अनुकूल नहीं हो सकता। इसलिए एक पेशा चुनते समय, हमें अल्पावधि और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए और अपने शिक्षकों, बड़ों और माता-पिता की राय और मार्गदर्शन के साथ साथ, परिवार की आर्थिक स्थिति और पेशे में भविष्य की संभावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए।

हर कोई एक सफल और सुखी जीवन जीना चाहता है। कई पेशे हैं जो लोग आज चुनते हैं जिनमें से कुछ डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, राजनेता और व्यवसायी आदि हैं, इसलिए एक सही पेशे के कारकों को ध्यान में रखते हुए, मैं भी, एक सफल डॉक्टर बनने की अपनी महत्वाकांक्षा रखता हूं।

पेशे से डॉक्टर मेरी प्रतिभा, कौशल और चरित्र के अनुरूप है। इस पेशे में रोगियों के लिए दया, समर्पण, निस्वार्थता, करुणा की आवश्यकता होती है। मैं शुरू से ही अपने शहर के गरीब लोगों की सेवा करने का सपना देखता था। मैं एक आदर्श डॉक्टर बनना चाहता हूं। कुछ डॉक्टरों का उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना होता हैं उनके लिए यह पेशा दौलत एकत्र करने का एक साधन मात्र हैं परन्तु मेरा लक्ष्य रोगियों का इलाज करके उन्हें शीघ्र स्वस्थ करना होगा। मैं अपनी खुद की एक डिस्पेंसरी शुरू करूंगा जिसमें मैं गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त दवा दूंगा।

इस प्रकार जीवन में हर किसी के पास एक लक्ष्य होना चाहिए। और इसे एक ऐसा लक्ष्य तय करके हासिल किया जा सकता है जो हमारे जीवन के लिए अनुकूल हो। इसलिए किसी भी पेशे को चुनने से पहले समझदारी से फैसला लेना जरुरी है क्योंकि यह हमारे जीवन को एक नई जगह और नई राह पर ले जाएगा।

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आज के समय में शायद ही ऐसा कोई होगा जो सिनेमा न देखता हो इसलिए सिनेमा आज के समाज को बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है। फिल्मों में ज्यादातर कहानियां समाज का प्रतिबिंब होती हैं और जिस तरह से सिनेमा को पर्दे पर यथार्थ किया जाता है वह लोगों को प्रभावित करता है। यह मनोरंजन का सबसे सस्ता और सबसे लोकप्रिय साधन है। बड़े शहरों में, कई सिनेमाघर हैं जहाँ किसी सिनेमा के पहले दिन का पहला शो देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रहती है।

सिनेमा मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण साधन है। प्रत्येक आयु वर्ग के लोग फिल्मों को देखने में समान रूप से रुचि रखते है। दिन में कड़ी मेहनत के बाद, एक अच्छी फिल्म हमारी नीरसता को दूर करती है। फिल्मों की विभिन्न श्रेणियां हैं जो विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करती हैं। यह शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संस्कृति, प्रचार और प्रसार पर आधारित हो सकती है।

सिनेमा प्रभावी शिक्षा का एक माध्यम है। शिक्षा, शिक्षण के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ गई है। छात्र पाठ्यपुस्तकों से सीखते समय उबाऊ महसूस करते हैं, जबकि दृश्य शिक्षण ध्यान देने वाला और दिलचस्प होता है। हर जगह इसे स्वीकार करने के लिए अभी भी कई चुनौतियां हैं। अधिकांश शिक्षक, शिक्षण के इस तरीके से वाकिफ भी नहीं हैं या इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसलिए शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें सक्षम बनाकर उनके कौशल का सदुपयोग किया जाना चाहिए।

सिनेमा का समाज पर एक शक्तिशाली प्रभाव है। मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत होने के अलावा, यह सामाजिक संदेश और समाज के जरूरी मुद्दों को हर व्यक्ति तक पहुचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फिल्में सामाजिक समस्याओं को दूर करने में बहुत मददगार साबित हो सकती हैं। समाज में फैली समस्याओं, अपराधों और कुरीतिओं को इनके द्वारा उजागर किया जा सकता है। इसके कुछ बुरे पक्ष भी है जैसे कि फिल्मों से लोग अपराध करने के नए तरीके सीखते हैं। आपराधिक फिल्में, युवा और अविकसित दिमागों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। बच्चे और युवा, सिनेमा में जो कुछ भी देखते हैं उसको असल ज़िंदगी में आजमाने करने की कोशिश करते हैं।

सिनेमा प्रचार और प्रसार का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। हम विज्ञान के युग में जी रहे हैं जहाँ व्यापार और उद्योग में तेजी से प्रगति हो रही है। एक तरफ तो देश में अधिकांश विकास कार्य सिनेमा द्वारा दिखाए जाते हैं। और दूसरी तरफ, इसका उपयोग व्यक्तिगत, राजनीतिक और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

इस प्रकार सिनेमा के अपने ही उपयोग और दुरूपयोग हैं। इसलिए यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम इससे क्या सीखते हैं और इससे क्या अपने जीवन में अपनाते हैं। भारतीय फिल्म का मानक आम तौर पर कम है। आधुनिक फिल्में उच्च आदर्शों को अनदेखा करती हैं और हमारे दिमाग को दूषित करती हैं इसलिए फिल्मों की गुणवत्ता में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

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सफल और खुशहाल जीवन जीने के लिए शरीर और दिमाग को फिट रखना बहुत जरुरी है इसलिए जीवन में खेलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की पढ़ाई और काम करना। अगर कोई व्यक्ति केवल काम करता है और खेलता नहीं है तो वह जल्दी ही अपने कार्य से ऊब जाएगा। इसलिए दिमाग के विकास के साथ-साथ शरीर का विकास भी जरुरी है जिस प्रकार हमारे मन को ज्ञान रूपी भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार हमारे तन को क्रीड़ा की है।

खेल स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी हैं। एक कहावत है, "स्वास्थ्य ही धन है", और यह धन हम बीमारियों से मुक्त रहकर प्राप्त कर सकते हैं और इसके लिए हम शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के व्यायाम खेलों के रूप में कर सकते है। खेल खेलने से मन तरो-ताज़ा रहता हैं और खेल शरीर को स्फूर्ति प्रदान करते हैं। जिससे हम अपने दैनिक कार्य अधिक सक्रियता से कर पाते है।

खेलों से छात्रों में अनुशासन की भावना विकसित होती है। एक अनुशासित टीम खेल जीतती है। खिलाड़ी खेल के नियमों और रेफरी के फैसले का पालन करते हैं। खेल खेलना खिलाड़ियों को जीवन में नियमों के महत्व को सिखाता है। इसलिए खिलाड़ी आम तौर पर दूसरों की तुलना में अधिक अनुशासित होते हैं। इससे खेलकूद की भावना का विकास होता है। जिसका मतलब है निष्पक्ष खेल, बिना किसी एहसान या पक्षपात के। खिलाड़ी टीम में खेलकर सफलता के लिए सहयोग की आवश्यकता सीखते हैं। इस गुणवत्ता के साथ, खिलाड़ी अपने जीवनकाल में अच्छे नागरिक साबित होते हैं। वे अपने भीतर सामुदायिक जीवन जीने और आत्म-त्याग की भावना विकसित करते हैं।

कुछ छात्र खेलों को निरर्थक और समय की बर्बादी का स्रोत समझकर उनकी उपेक्षा करते हैं। वे गलत हैं क्योंकि खेल खेलने के बाद, हम अपनी खोई हुई ऊर्जा वापस पा लेते हैं और हम अधिक रुचि के साथ अध्ययन करते हैं।इसलिए खेलों का हर शिक्षा संस्थान में छात्रों के लिए एक अनिवार्य विषय होना चाहिए।

खेलों का हमारे जीवन में एक उच्च स्थान होना चाहिए। स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमें खेलों में भाग लेना चाहिए। यह सुस्ती को दूर करता है और हमें खुश रखता है। अगर हमारा स्वास्थ्य खराब है तो हम कोई काम नहीं कर सकते। यह बहुत ही निराशाजनक है कि हमारे खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में बहुत कम स्वर्ण पदक जीतते हैं। सरकार को इस संबंध में एक राष्ट्रीय नीति तैयार करनी चाहिए। खिलाड़ी हमारे राष्ट्र का गौरव हैं। हमारी सरकार को एथलीटों को वित्तीय और तकनीकी रूप से मदद करनी चाहिए ताकि वो खेल के प्रति अपनी रूचि को प्रज्वलित कर सकें।

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सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्य श्यामलां मातरं। वन्दे मातरम्

हर वर्ष 26 जनवरी गणतंत्र दिवस को हम राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। इसी दिन वर्ष 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। इस दिन को हम राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाते हैं और भारत देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करते हैं। डॉ भीमराव अम्बेडकर संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम संविधान का प्रारूप तैयार किया था। भारत के लोकतंत्र में नागरिकों को देश और इसके लोगों के हित में काम करने वाले उम्मीदवारों को मतदान द्वारा निर्वाचित करने का अधिकार है।

यह दिन देश के सभी लोगों के लिए एक विशेष महत्व रखता है। यह बहुत खुशी, सम्मान, बलिदान और गौरव का दिन है। यह हमें उन बलिदानों की याद दिलाता है जो हमारे प्यारे स्वतंत्रता सेनानियों को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता जीतने के लिए देना पड़ा था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह, सरदार बल्लभ भाई पटेल, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने भारतीय लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना भरी थीं और सम्पूर्ण भारतवासियों ने अपने आप को ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की अग्नि में समर्पित कर दिया था और इस प्रचंड अग्नि से उठी लपटों ने आखिरकार ब्रिटिश शासन को अपनी चपेट में ले ही लिया, जिसके फलस्वरूप भारत को 15 अगस्त 1947 में आजादी मिली।

प्रतिवर्ष 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में राजपथ पर भारत के राष्ट्रपति के समक्ष एक भव्य परेड आयोजित की जाती है। इस दिन भारत का राष्ट्रीय ध्वज भारत के राष्ट्रपति द्वारा फहराया जाता है और राष्ट्रीय ध्वज को सैन्य और सामूहिक सलामी द्वारा सम्मानित किया जाता है। हर राज्य में, राज्य का राज्यपाल राष्ट्रीय ध्वज को फहराता है। स्कूलों, कॉलेज व कार्यालयों को तिरंगे झंडों, गुब्बारों एवं पतंगों से सजाया जाता है। देश के सभी सरकारी और निजी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। इस दिन, स्कूलों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद, सभी शिक्षक और छात्र राष्ट्रगान "जन गण मन" और राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" गाते हैं। छात्र गणतंत्र दिवस पर भाषण देते हैं और सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं। उत्सव के बाद स्कूलों में मिठाइयां बांटी जाती है।

यह भारतीयों के लिए एक यादगार दिन है। यह दिन हमें संदेश देता है कि हमें अपने आंतरिक मतभेदों को भूल जाना चाहिए और हमें भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बेरोजगारी, असमानता, पूंजीवाद आदि समस्याओं के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
"इंकलाब जिंदाबाद"

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न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार "प्रत्येक क्रिया के लिए, एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।" इस तरह विज्ञान भी एक ही समय में वरदान और अभिशाप हो सकता है। विज्ञान के आशीर्वाद में सबसे बड़ा वरदान या सबसे बुरा शाप भी हो सकता है। हम विज्ञान को दोष देते हैं। वास्तव में, इसके दुरूपयोग के लिए हमें खुद को दोष देना चाहिए। यह एक आशीर्वाद है यदि हम इसे एक सेवक के रूप में उपयोग करते हैं और यह एक अभिशाप है यदि हम इसे अपना स्वामी बनाते हैं।

विज्ञान ने समय और दूरी को जीतने में हमारी मदद की है। कार, ट्रेन, जलयान, हवाई जहाज हमें कम समय में एक जगह से दूसरी जगह जल्दी और आराम से ले जाते हैं। विज्ञान की मदद से आज एक व्यक्ति मछली की तरह समुद्र में तैर सकता है और पक्षी की तरह हवा में उड़ सकता है। जब विज्ञान हमारा स्वामी बन जाता है, तो यह बहुत विनाशकारी होता है और हम लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों का उपयोग निर्दोष लोगों पर बम गिराने और हमारी सुन्दर प्रकृति को नष्ट करने के लिए  करते हैं।

दूरसंचार के क्षेत्र में विज्ञान ने जबरदस्त सफलता हासिल की है। अब हम स्मार्टफोन का उपयोग करके वॉयस और वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दुनिया में किसी से भी सम्पर्क साध सकते हैं। ऐसी कई सेवाएं हैं जो हमारे मोबाइलों पर सरल एप्लिकेशन इंस्टॉल करके हमें लाभान्वित करती हैं। वायरलेस, इंटरनेट, उपग्रह और अंतरिक्ष यान हमारे जीवन में किसी वरदान से कम नहीं हैं। लेकिन दूसरी तरफ, सेल फोन टावरों से निकलने वाले विकिरण का हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हम उपग्रहों और रॉकेटों के मलबे को पृथ्वी की बाहरी कक्षा में फैला रहे हैं।

विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में भी चमत्कार किया है। तकनीक और नई दवाओं की मदद से कई घातक बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। लेकिन इसका अपना बुरा पक्ष भी है कि ये दवाएं प्रतिक्रियाओं का कारण बनती हैं और कई अज्ञात बीमारियों को जन्म देती हैं।

हमने मशीनों को अपना सेवक बनाने के लिए इनका आविष्कार किया था लेकिन हम उन पर इतना निर्भर हो गए हैं कि हम उनके दास बन गए हैं। कुछ ही समय में लिफ्ट हमें इमारत के शीर्ष पर ले जाती है। क्रेन भारी वजन उठाती हैं। मशीनें खेतों की जुताई करती हैं, बीज बोती हैं और फसल काटती हैं। ऐसी मशीनें भी हैं जो सैकड़ों या हजारों मजदूरों का काम करती हैं। मशीनों ने पूंजीवाद को जन्म दिया है। मशीनों और कारखानों ने कई मजदूरों और कारीगरों का रोजगार छीन कर उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है।

विज्ञान ने हमें परमाणु बम दिया है जो युद्ध का एक विनाशकारी हथियार है। हिरोशिमा, नागासाकी और खाड़ी युद्ध की भयावह तस्वीर हमारे सामने है। परमाणु हथियार एक पल में वो सब कुछ नष्ट कर सकते हैं जिसके निर्माण में सदिया लगती हैं।

विज्ञान ने ईश्वर में हमारी आस्था को भ्रमित कर दिया है। इसने हमें भौतिकवादी बना दिया है। हम मानवीय मूल्यों को भूल गए हैं। हमारा भगवान केवल पैसा है। इस प्रकार हम यह भी देखते हैं कि विज्ञान ने हमें अपार शक्ति दी है और यह स्वर्ग और नर्क दोनों को हमारी दुनिया में ले आया है। अब ये यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम अपने रहने के लिए कौन-सा स्थान चुनते हैं।

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महात्मा गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी है। उन्हें हम लोग राष्ट्रपिता और बापू के नाम से भी जानते है।महात्मा गाँधी अपनी सदी के सबसे महान व्यक्तियों में से एक थे। वह न केवल एक महान राजनीतिज्ञ थे बल्कि एक महान सामाजिक और धार्मिक नेता भी थे। वह सत्य, शांति और अहिंसा के पुजारी थे। उन्होंने अपना सब कुछ अपने देश और देशवासियों के लिए न्योछावर कर दिया था। सत्य और अहिंसा के उनके सिद्धांतों को पूरी दुनिया में आज भी सराहा जाता है।

महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबन्दर, गुजरात में हुआ था। प्रत्येक वर्ष उनका जन्म दिन भारत में गाँधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। उनके पिता का नाम करमचन्द और माता का नाम पुतलीबाई है। उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गाँधी है जिनसे उनका विवाह 13 वर्ष की आयु में हुआ था।उनके बच्चों के नाम हरीलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास है। मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात वे बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड चले गए थे।

भारत वापसी के बाद महात्मा गाँधी ने बम्बई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू कर दी परन्तु इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। साल 1913 में, वे दक्षिण अफ़्रीका चले गए, वहाँ उन्होंने गोरों द्वारा भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने भारतीयों की दशा सुधारने के लिए सत्याग्रह आंदोलन किया और वे तब तक चैन से नहीं बैठे जब तक भारतीय राहत अधिनियम पारित नहीं हुआ।

सन 1915 में, गाँधी जी दक्षिण अफ़्रीका से भारत लौट आये और यहाँ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। उन्होंने सत्य, अहिंसा और शांति को भारत में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध शस्त्र की तरह उपयोग किया। और उन्होंने पूर्ण स्वराज प्राप्त करने के लिए वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन, सन 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा साल 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुवात की। इन सब विरोधों के लिए वे कई बार जेल भी गए। ऐसे कई अथक प्रयासों के बाद भारतीयों की विजय हुई और वर्ष 1947 को भारत को ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में गाँधी जी को नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या की गयी थी। गाँधीजी वास्तव में संसार की रोशनी थे उन्होंने भारतवर्ष और संसार को प्रेम, सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखलाया। वे जीवन भर तथा जीवन उपरान्त अपने इन्हीं आदर्शो के लिए जाने गए और आगे भी इसी प्रकार जाने जायेगे। भारत और उसकी आज़ादी गाँधी जी को सदैव याद रखेंगी।

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वर्तमान में हमारे देश के समक्ष सबसे गंभीर मुद्दा तेजी से बढ़ती जनसंख्या की समस्या है। चीन दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला पहला देश है। इसके बाद भारत आता है। हर साल हमारी आबादी में एक नया ऑस्ट्रेलिया जुड़ जाता है। अगर यह समस्या हल नहीं हुई, तो हम एक खुशहाल, स्वस्थ और समृद्ध जीवन नहीं जी सकते।

जनसंख्या वृद्धि का प्रभाव हर जगह महसूस किया जाता है। ट्रेनों में भीड़ ज्यादा है। गाँवों में भूमि विभाजित है और आगे आने वाली पीढ़ियों में फिर विभाजित होती है। बेरोजगारों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जंगल गायब हो रहे हैं। आवास की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्तियों को बढ़ाती है और ये लोग जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के अपर्याप्त ज्ञान के साथ जन्म दर में अधिक योगदान देते हैं।

इस समस्या के कई कारण हैं। भारत एक गर्म देश है, तो स्वाभाविक रूप से, यहाँ प्रजनन दर अधिक है। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु दर में गिरावट आई है। इस समस्या को गंभीर बनाने के लिए हमारे सामाजिक रीति-रिवाज भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि यहाँ निःसंतान या अविवाहित व्यक्ति को असम्मान की दृष्टि से आंका जाता हैं। आज भी कई पिछड़े गांवों में कम उम्र में विवाह की प्रथा प्रचलित है और बाल-बच्चों वाले विधुर फिर से विवाह करके प्रजनन दर में वृद्धि करते है। महिलाओं की अशिक्षा भी जनसंख्या वृद्धि का एक बड़ा कारण है।

जनसंख्या वृद्धि की जाँच करने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए परिवार नियोजन ही एकमात्र उपाय है, परिवार नियोजन या कल्याण का मतलब परिवार में बच्चों की संख्या को नियंत्रित रखना है। नियोजित परिवार इस समय की मांग है। हमें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि बच्चे जितने कम होंगे, उनकी देखभाल उतनी ही अच्छी और बेहतर होगी और उनका जीवन खुशहाल होगा।

हम जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं। सरकार को परिवार नियोजन और जन्म नियंत्रण अभियानों को लागू करना चाहिए। शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाई जानी चाहिए। महिलाओं के लिए मुफ्त शिक्षा और अधिक रोजगार होने चाहिए। यदि कुछ शादीशुदा जोड़ों को महंगे प्रजनन उपचार के बाद भी कोई बच्चा नहीं है तो वे अनाथ बच्चों को गोद ले सकते हैं। किसी भी व्यक्ति पर शादी और बच्चे करने के लिए सामाजिक रूप से दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। सरकार ने इस गंभीर मुद्दे को नियंत्रित करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं लेकिन ये कदम इस समस्या को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। अगर सरकार और लोग मिल कर प्रयास करें तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।

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मूल्य-वृद्धि की समस्या आज एक गंभीर चिन्तन का विषय है। यह इन दिनों बहुत आम है कि रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। मूल्य-वृद्धि की समस्या इस कदर गंभीर हो गई है कि सरकार भी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने में असमर्थ है। यहां तक कि भारत जैसे प्रगतिशील देश में कीमतों में वृद्धि बहुत स्वाभाविक है। लेकिन जब यह नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो यह जनता के लिए बहुत मुश्किलें पैदा करती है। यदि समस्या को उचित तरीके से सम्भाला नहीं जाता है, तो यह एक भयावह मोड़ ले सकती है।

उच्च कीमतों के कई कारण हैं। कीमतों में इस तरह की वृद्धि प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, अकाल और सर्वव्यापी महामारी के कारण हो सकती है। बढ़ती कीमतों के अन्य कारण मुद्रास्फीति, रिश्वत, भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, जमाखोरी, तस्करी, मुनाफाखोरी और कई अन्य राष्ट्र-विरोधी और सामाजिक-विरोधी प्रवृत्तियाँ हो सकती हैं। जनसंख्या वृद्धि भी इसके प्रमुख कारणों में से एक है। महँगाई का एक कारण लोगों का जरूरत से ज्यादा चीजें ख़रीदना भी हैं। मूल्य-वृद्धि उन लोगों की बुरी मानसिकता का नतीज़ा भी है जो लोग गलत तरीकों से रातों रात करोड़पति बनना चाहते हैं।

उच्च कीमतों का लोगों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। ये बढ़ती कीमतें जीवन जीने की लागत को बढ़ाती हैं। यह अति निराशाजनक है कि कुछ व्यवसायियों का समूह अनुचित साधनों द्वारा आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करके बहुत अधिक धन अर्जित करता है। इस प्रवृत्ति के लिए, अधिकांश लोगों को अनकही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि वर्तमान में यह स्थिति जारी रहती है, तो मध्यम वर्ग के लोग समाज में अपनी स्थिति को बनाए रखने में सक्षम नहीं होंगे।

सरकार इस समस्या से भलीभांति अवगत है। सरकार द्वारा आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि हुई है और उन्हें उचित और प्रभावी तरीके से वितरित करने की कोशिश भी की जा रही है। जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जनसंख्या की वृद्धि की लगातार जाँच होनी चाहिए। सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सरकार को आवश्यक वस्तुओं के व्यापार पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह सरकार का कर्तव्य है कि वह उत्पादन बढ़ाने के नए तरीकों का पता लगाए, और मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखे। सरकार लोगों के समर्थन के साथ ही इस समस्या को हल कर सकती है, इसलिए यह केवल सरकार का कर्तव्य नहीं है, बल्कि हमारी भी जिम्मेदारी है।

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वनीकरण का मतलब जंगलों को बनाने के लिए बंजर भूमि में पेड़ लगाना है। वन किसी देश की प्राकृतिक संपदा हैं। हम प्लाईवुड और अन्य जरूरतों के लिए पेड़ों को स्वतंत्र रूप से काट रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप खूबसूरत हिल स्टेशनों का आकर्षण भी लुट सा गया है। ठेकेदारों की कुल्हाड़ीया और धन के प्रति लालच हमारे जंगलों को बर्बाद कर रहा हैं। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, कृषि के लिए भूमि, रेलवे और रोडवेज को स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जा रही है।

जल की तरह ऑक्सीजन भी हमारे जीवन की प्रमुख आवश्यकता है, इसके बिना मानव जीवन संभव नहीं है इसलिए इसे प्राणवायु भी कहा जाता है और ये प्राणवायु मनुष्य जाति को वृक्षों और वनस्पतियों से प्राप्त होती है। वन वर्षा को अपनी और आकर्षित करते हैं। वन मिट्टी का कटाव, बाढ़ तथा सूखा जैसी आपदाओं को रोकते हैं। वन ग्लोबल वार्मिंग को रोकने और प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं। हमें जंगलों से भोजन, फल, लकड़ी और दवाएं मिलती हैं। कागज, माचिस और रबर उद्योग जंगलों पर निर्भर हैं। पेड़ों की छाया गर्म मौसम में हमें शीतलता प्रदान करती हैं। वन बाघ, शेर, भालू, चीता जैसे कई तरह के जंगली जानवरों को आश्रय देते हैं।

पौधों और जानवरों के संरक्षण के लिए भारत की संसद द्वारा 1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम पारित किया गया। वनों के संरक्षण और वनों की कटाई को रोकने के लिए 1980 में भारत की संसद द्वारा वन संरक्षण अधिनियम पारित किया गया। यह अधिनियम राज्य सरकारों पर गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि का उपयोग करने के लिए लगाये गए प्रतिबंधों के बारे में है। राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोर्ड (एनडब्ल्यूडीबी) को 1985 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के तहत मुख्य रूप से देश की बंजर भूमि को वनीकरण और वृक्षारोपण करने के लिए स्थापित किया गया था।

जो लोग ईंधन के लिए वनों पर निर्भर है उन्हें विकल्प के रूप में गैस वितरित की जा सकती है। लोगों को प्रिंटिंग पेपर के उपयोग से बचना चाहिए और कागज की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना चाहिए। एग्रोफोरेस्ट्री का उपयोग करके, हम कृषि फसलों के साथ-साथ पेड़ भी लगा सकते हैं। पुराने जंगलों में खाली जगहों पर नए पेड़ लगाए जा सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा ऑनलाइन कई अभियान चलाए जाते हैं जिसके अन्तर्गत पेड़ लगाने के लिए ऑनलाइन फंड इकट्ठा किया जाता हैं।

वनीकरण हमारे मुख्य उद्देश्यों में से एक होना चाहिए। वन संपदा का संरक्षण करना सरकार और लोगों का कर्तव्य है। प्रतिवर्ष भारत में लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए "वन महोत्सव" मनाया जाता है और यह महोत्सव लोगों को पेड़ लगाने की आवश्यकता के बारे में जागरूक भी करता है।

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"वन्यजीव संरक्षण" का अर्थ - बाघ, शेर, तेंदुआ जैसे कई जंगली जीवों को जंगलो, घाटिओ, पहाड़ों में स्वतंत्र जीवन प्रदान करना है। वन्यजीवों का संरक्षण, वन्य प्रजातियों और उनके आवासों को बचाकर किया जाता है ताकि ऐसे जीव जन्तु जो विलुप्ति के कगार पे हैं उन्हें बचाया जा सकें।

मनुष्य ने भोजन के लिए, मनोरंजन के लिए और धन के लालच में जंगली जानवरों का शिकार किया है। इससे कई प्रजातियों के वन्यजीव विलुप्त हो गए हैं। मनुष्य बाघों, शेरों, सांपों, हिरणों, मगरमच्छों को उनकी त्वचा के लिए और हाथियों को उनके दांतो के लिए मारता है। लालच इतना बढ़ गया है कि कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। लोग सर्कस में जानवरों को मनोरंजन की वस्तु के रूप में प्रयोग करते हैं जहां मनुष्यों को खुश करने के लिए जानवरों के साथ दुर्व्यवहार और शोषण किया जाता है। वनों की कटाई भी जंगली जानवरों के गायब होने का एक मुख़्य कारण है।

भारत में सरकार द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रयास किए गए है। जिसमें वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में भारत में पारित किया गया था। यह अधिनियम जानवरों, पक्षियों और पौधों की जंगली प्रजातियों को सुरक्षा प्रदान करता है जो कि विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। भारत में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) और वर्ल्ड वाइल्ड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) जैसे दो सबसे बड़े गैर-सरकारी संरक्षण संगठन भी इस क्षेत्र में सराहनीय काम कर रहे हैं।

वन्यजीवों के संरक्षण के उद्देश्य से भारत में कई अभयारण्यों की स्थापना की गई है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जो कि मध्य प्रदेश में स्थित है यह स्थान बाघ, सियार, बारासिंघा जैसे जंगली जानवरों के लिए एक आदर्श घर है। गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान शेरों, मृगों और तेंदुओं को सुरक्षित स्थान देने के लिए स्थापित किया गया था। उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, उत्तर प्रदेश में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान में भरतपुर पक्षी अभयारण्य, पश्चिम बंगाल में रायगंज वन्यजीव अभयारण्य इसके कुछ उदाहरण हैं।

वन्य जीव राष्ट्र की धरोहर है अतः इनका संरक्षण अनिवार्य है। कुछ जीव-जन्तु मृत प्राणियों और पौधों को खाकर प्राकृतिक खाद्य-श्रृंखला को पूर्ण करते हैं और साथ ही साथ वे पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखते हैं। इनमें से कुछ जानवर इंसुलिन और एंटी-वेनम जैसी दवाओं के स्रोत हैं। अभयारण्य एक अच्छी आय का स्रोत भी हैं क्योंकि देश के भीतर और बाहर से पर्यटक यहाँ पर प्रकृति का आनंद लेते है।

जंगली जानवर और पक्षी मानव जाति के लिए अत्यधिक उपयोगी हैं। उनका गायब होना प्रकृति में खालीपन पैदा करेगा। "वन्यजीव सप्ताह" भारत में अक्टूबर के पहले सप्ताह में वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है ताकि आने वाली पीढ़ियां इन प्रजातियों को देख सकें। हर साल "विश्व वन्यजीव दिवस" मनाया जाता है इसका उद्देश्य दुनिया के जंगली जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। संक्षेप में कहा जाये तो हमें वन्यजीवों को, हमारे देश की धरोहर को विलुप्त होने से बचाना चाहिए।

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हम सभी को ये ज्ञात हैं कि प्रदूषण की समस्या आज एक भयावय रूप धारण कर चुकी है। मनुष्य ने प्रकृति के साथ बहुत अधिक हस्तक्षेप किया है और पृथ्वी के पर्यावरण को जिसमें हवा, पानी और मिट्टी शामिल है, कई तरीकों से प्रदूषित किया है। प्रदूषित पर्यावरण सभी प्रकार के जीवन को प्रदूषित करता है ये न तो केवल मानव बल्कि पशुओं और वनस्पतिओं को भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता हैं।

धीरे-धीरे हम यह भी महसूस कर रहे हैं कि प्रकृति का यह अनमोल उपहार नष्ट हो रहा है और हम जिस प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं और हम जो प्रदूषित पानी पीते हैं, उससे मानव जीवन की आयु घटती जा रही है। हवा में प्रदूषकों की वृद्धि ही ग्लोबल वार्मिंग का एक मूल कारण है, जिससे पृथ्वी की सतह के तापमान और समुद्र के स्तर में लगातार अनावश्यक वृद्धि हो रही है|

वायु प्रदूषण ज्यादातर कारखानों, मिलों, कार्यशालाओं, वाहनों की चिमनियों से निकलने वाले धुएँ और पटाखे जलाने के कारण होता है। वायु प्रदूषण से फेफड़े के रोग, अस्थमा, आंखों का फ्लू, सिरदर्द जैसी अनेकों बीमारियाँ हो सकती है।

जल जीवन का मूल आधार है लेकिन मनुष्य को अधिक से अधिक धन प्राप्त करने का लालच इसे प्रदूषित करता जा रहा है। उद्योगों के मालिक अपशिष्ट पदार्थों को पृथ्वी की सतह पर या नदियों में फेंक देते हैं। लोग इस प्रदूषित पानी का उपयोग अपनी दिनचर्या में करते हैं और कई बीमारियों को आमंत्रित करते हैं। जल प्रदूषण के परिणामस्वरूप ही दिल्ली की कई कालोनियों में हैजा का प्रकोप हुआ था। धार्मिक प्रथाओं के कारण भी दुनिया भर में जल प्रदूषण होता है।

ध्वनि प्रदूषण जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक है। ऐसा प्रमाणित है कि 80 डेसिबल से अधिक का शोर बहरापन और अन्य बीमारियों का कारण बनता है। बड़े शहरों में वाहनों की गर्जना असहनीय है। उनके इंजन और हॉर्न जो शोर पैदा करते हैं वो लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जानवरों में मनुष्यों की तुलना में सुनने की शक्ति कुछ ज्यादा होती है इसलिए शादी और त्योहारों में पटाखे फोड़ने से उन पर भयानक प्रभाव पड़ता है।

प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए, लोगों को सार्वजनिक परिवहन या कारपूल का उपयोग अधिक करना चाहिए जो वाहनों द्वारा होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। उद्योगों का मलबा धरती की सतह पर या नदियों में नहीं डाला जाना चाहिए। इसे उपयुक्त रसायनों के उपयोग से नष्ट कर दिया जाना चाहिए। वनों की कटाई नहीं होनी चाहिए। लोगों को घरेलू कचरे को सड़कों पर नहीं फेंकना चाहिए। लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार को रीसाइक्लिंग तकनीक को बढ़ावा देना चाहिए। त्योहारों और शादियों में पटाखों से बहुत अधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण होता है इसलिए हमें इनका प्रयोग करने से बचना चाहिए। पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण का एक मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि भी है जिसको नियंत्रित करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। देश के लोगों को भी सरकार के साथ मिलकर प्रदूषण को नियंत्रित करना चाहिए। इन समस्या को नियंत्रित करना न केवल सरकार का कर्तव्य है, बल्कि जनता की भी उतनी ही जिम्मेदारी है।

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"हम अनावश्यक रूप से युद्धों में अपने कीमती संसाधनों को बर्बाद कर रहे हैं ... अगर हमें युद्ध छेड़ना चाहिए, तो हमें इसे बेरोजगारी, बीमारी, गरीबी और पिछड़ेपन पर करना होगा।" - श्री अटल बिहारी वाजपेयी

बेरोजगारी की समस्या हमारे देश और पूरी दुनिया में सबसे गंभीर समस्या है। बड़ी संख्या में शिक्षित और अशिक्षित लोग किसी न किसी नौकरी की तलाश में रहते हैं। वे काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे इसे प्राप्त नहीं कर सकते। शहरों, कस्बों और गांवों में बेरोजगारी है। एक बेरोजगार व्यक्ति समाज के लिए एक उपद्रव है। एक भूखा आदमी कोई भी गलत कर सकता है। इसलिए, यह हमारी सरकार का कर्तव्य है कि बेरोजगारी की समस्या को जल्द से जल्द हल करे।

भारत में बेरोजगारी के कई कारण हैं। बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण देश की अधिक जनसंख्या है। देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन नौकरियों को उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसलिए बड़ी संख्या में कुशल और प्रतिभाशाली लोग बेरोजगार रहते हैं।

बेरोजगारी का एक अन्य कारण हमारी शिक्षा की दोषपूर्ण प्रणाली भी है। वर्तमान शिक्षा अधिकांशता किताबी है। यह शिक्षा नौकरी उन्मुख होनी चाहिए। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली छात्रों को व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार नहीं कर रही है और आज का हर एक युवा केवल एक सफेदपोश नौकरी के लिए दौड़ लगा रहा है।

बेरोजगारी के लिए मशीनें भी जिम्मेदार हैं। एक अकेली मशीन सैकड़ों या हजारों लोगों का काम करती है। इसलिए श्रमिक बेरोजगार रहते है और उनका दिमाग उस आबादी को अपराध, झुंझलाहट और तनाव की ओर ढकेल देता है। महात्मा गांधी का बेरोजगारी को दूर करने का विचार बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं बल्कि जनता द्वारा उत्पादन था।

इन समस्याओं को हल करने के लिए, जनसंख्या की तेजी से वृद्धि पर एक नियमित जांच होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन का कार्यक्रम अधिक सक्रिय होना चाहिए। प्रणाली को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक ज्ञान को महत्व दिया जाना चाहिए। सरकार को शिक्षित बेरोजगारों के लिए अधिक नौकरियों का सृजन करना चाहिए। कुटीर और लघु उद्योग विकसित किए जाने चाहिए। सरकार और बैंकों को कुटीर उद्योग और स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए युवाओं का समर्थन करना चाहिए।

निष्कर्ष ये हैं कि हमारी सरकार उन समस्याओं को हल करने की कोशिश कर रही है जिन्हें एक अति गंभीर समस्या के रूप में लिया जाता है। जनसंख्या को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी, सरकार को इस समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए और अधिक प्रयत्न करने होंगे। सरकार द्वारा सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजनाएं को बढ़ावा दिया जा रहा हैं। कई सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रदान किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा लघु उद्योगों और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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योगासन के प्रकार, योग आसन, योग की स्थितियाँ
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Locust pose - Shalbhasanशलभासन
Bow pose - Dhanurasanधनुरासन
Camel pose - Ustrasanऊष्ट्रासन
Wheel pose - Chakrasanचक्रासन
Head-to-Knee pose - 
Janusirsasan
जानुशीर्षासन
Triangle pose - Trikonasanत्रिकोणासन
Fish pose - Matsyasanमत्स्यासन
Peacock pose - Mayurasanमयूरासन
Cow Face pose - 
Gomukhasan
गोमुखासन
Half lord of the fishes pose - 
Ardha Matsyendrasan
अर्ध मत्स्येंद्रासन
Gracious pose - Bhadrasanभद्रासन
Locked Lotus pose - 
Baddh Padmasan
बद्ध पद्मासन
Lotus pose - Padmasanपद्मासन
Supported Headstand - 
Shirshasan
शीर्षासन
Raised Leg pose - 
Uttanpadasan
उत्तानपादासन
Corpse pose - Shavasanशवासन